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मृत्यु

पेड़-पौधे, फूल-फल,
पहाड़, नदी, तालाब,
खेत-खलिहान और
बादल, आकाश, मौसम
जब तक धरती से जुडे़ रहेंगे
धरती बची रहेगी!
धरती ही क्यों?
पूरे ब्रह्माण्ड का अस्तित्व ही तब तक है
जब तक द्वन्द्व है!
जो कहते हैं:
द्वन्द्व नहीं उनके भीतर
शान्त है वह
सबसे बड़ा झूठ है यह
क्योंकि द्वन्द्व के बिना
संभव नहीं है ‘प्रगति’
शान्ति संभव नहीं इस धरती पर
ब्रह्माण्ड में भी,
हर क्षण टूट रहा है कुछ-न-कुछ
हर क्षण बन रहा है कुछ-न-कुछ
इसी को नया-पुराना कहते हैं सब
समय से टकराने वाले द्वन्द्व के करीब पहुँचे हम,
जहाँ द्वन्द्व नहीं मृत्यु कहते हैं उसे सब!!!
                                                               02-09-2016

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कविताएँ

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