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Showing posts from March, 2014

कविता

होली अपनी होली है  होली अपनी होली है कोई खेले मेल मिलावन को कोई खेले मैल छुडावन को कोई खेले रंग बुझावन को कोई खेले भंग चढ़ावन को कोई खेले मन रंगावन  को कोई खेले रंग रंग जवान को